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प्राइवेट नौकरी वालों को मोदी सरकार का तोहफा

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मोदी सरकार ने प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों को आज एक बड़ी खुशखबरी दी है। गुरुवार को लोकसभा में दो अहम बिल पारित हो गए। इनमें पेमेंट ऑफ ग्रेच्‍युटी एमेंडमेंट बिल और स्‍पेसिफिक रिलीफ एमेंडमेंट बिल प्रमुख हैं।

प्राइवेट नौकरी वालों को मोदी सरकार का तोहफा, लोकसभा में पास किये दो अहम बिल

अब निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने और मातृत्व अवकाश की अवधि मौजूदा 12 सप्ताह से बढ़ाने संबंधी ग्रेच्युटी भुगतान (संशोधन) विधेयक, 2017 आज भारी हँगामे के बीच बिना चर्चा के लोकसभा में पारित हो गया।

श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने सदन में बताया कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के अनुरूप केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गयी है।

विधेयक में निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए भी ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने का प्रावधान है।

उन्होंने बताया कि महिलाओं कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश की सीमा बढ़ाये जाने का भी विधेयक में प्रावधान है। मौजूदा सीमा 12 सप्ताह है और बढ़ी हुई सीमा के बारे में सरकार बाद में अधिसूचना जारी करेगी।

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एक अप्रैल से हो रहे हैं 5 बड़े बदलाव, आपको होंगे ये फायदे

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अगर आप नौकरीपेशा हैं और इनकम टैक्स को लेकर जानकारी चाहते हैं तो ये खबर आपके लिए है। आम बजट 2018-19 में वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने इनकम टैक्‍स स्‍लैब में कोई बदलाव नहीं किया और न ही टैक्‍स छूट की सीमा ही बढ़ाई। हालांकि टैक्स नियमों में कई जरूरी बदलाव का प्रस्‍ताव उन्होंने जरूर रखा। इनकम टैक्स नियमों में ये बदलाव 1 अप्रैल से लागू होंगे। इन बदलावों का सबसे ज्यादा असर टैक्सपेयर्स पर पड़ेगा। इनकम टैक्स को लेकर आखिर क्या नियम बदले गए हैं, जो 1 अप्रैल से लागू होंगे…।

स्टैंडर्ड डिडक्शन

स्टैंडर्ड डिडक्शन आम बजट 2018 में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने स्टैंडर्ड डिडक्शन का प्रस्ताव दिया है। इसके लागू होने पर 2.5 करोड़ वेतनभोगियों को फायदा मिलेगा। इनकम टैक्स छूट के नाम पर सीधे तौर पर 40000 रुपए का स्टैंडर्ड डिडक्शन होगा और मेडिकल, ट्रांसपोर्ट अलाउंस इससे हट जाएंगे। इसका साफ मतलब है कि ट्रांसपोर्ट अलाउंस (19200 रुपये) और मेडिकल रिम्बर्समेंट (15000 रुपये) हट जाएंगे। स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा उन वरिष्ठ नागरिकों को खास तौर से मिलेगा जिन्हें अब तक मेडिकल और ट्रांसपोर्ट का फायदा नहीं मिलता था।

लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स

लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स इक्विटी निवेश पर सरकार ने लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स फिर से पेश किया है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स उन लोगों पर लागू होगा जिनकी शेयर बिक्री से आय 1 लाख रुपए से अधिक है। एक अप्रैल से नए नियम के मुताबिक 1 लाख से अधिक आय पर 10 फीसदी टैक्स चुकाना होगा, साथ ही अतिरिक्त सेस भी वसूला जाएगा। हालांकि, टैक्स अदा करने वालों को राहत देते हुए, 31 जनवरी 2018 तक की आय पर कोई टैक्स नहीं चुकाना होगा।

इनकम टैक्स सेस बढ़ेगा

इनकम टैक्स पर लगने वाले सेस में भी बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव किया गया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट में इनकम टैक्स पर लगने वाले एजुकेशन सेस को बढ़ाकर 4 फीसदी कर दिया है। वर्तमान में यह सेस 3 फीसदी लगता है। बता दें कि यह सेस टैक्सदाताओं के टैक्स पर लगाया जाता है।

इक्विटी म्यूचुअल फंड के डिविडेंट पर टैक्स

शेयर बाजार से जुड़े इक्विटी म्यूचुअल फंड्स के डिविडेंड पर 10 फीसदी टैक्स का प्रस्ताव किया गया है। 1 अप्रैल, 2018 लागू होने पर इक्विटी म्यूचुअल फंड के डिविडेंट पर 10 फीसदी टैक्स लगेगा।

NPS निकासी पर टैक्स छूट

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट 2018 में नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) की निकासी पर टैक्स छूट का प्रावधान करने का प्रस्ताव किया है। नौकरी छूटने पर नेशनल पेंशन सिस्टम में टैक्स छूट मिल सकती है। इसका फायदा उन लोगों को भी मिलेगा जो नौकरी नहीं कर रहे, लेकिन एनपीएस के सदस्य हैं उन्हें टैक्स छूट मिलेगी। वर्तमान व्यवस्था में नौकरी नहीं करने वाले को इसमें छूट नहीं मिलती थी। एक अप्रैल के बाद उन्हें फायदा मिलेगा।

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आपके खाते में नहीं आएंगे एलपीजी गैस सब्सिडी, ये है वजह

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अब आपके खाते में नहीं आएंगे एलपीजी गैस सब्सिडी, ये है बड़ी वजह

बैंक ने एलपीजी गैस की सब्सिडी देने के नियमों में कुछ बदलाव किया है। इस नियम के तहत उन्हीं उपभोक्ताओं को एलपीजी गैस सब्सिडी दी जाएगी जिनके बैंक एकाउंट में न्यूनतम बैलेंस तीन हजार रुपए होना चाहिए। हाल ही में शहर में लोगों ने इसकी शिकायत गैस कंपनी से की थी की उन्हें एलपीली सब्सिडी नहीं दी जा रही है। इतना ही नहीं बैंक पेनाल्टी के तौर पर आपके खाते से राशि काट लेती है। इसके आलवा एलपीजी सब्सिडी नहीं आना आधार लिंकिंग के अलावा ये अन्य कारण हो सकते हैं। जिसे जानना आपके लिए बेहद जरूरी है..

बड़ी संख्या में खाते हुए इनएक्टिव
प्रशासन ने बड़ी मात्रा में जनधन खाते खुलवाए। इसके बाद इन्हीं खातों में उज्ज्वला योजना के तहत प्रदाय गैस सिलेंडर की सब्सिडी की राशि को क्रेडिट किया जाने लगा। लेकिन वर्तमान में जनधन के बड़ी संख्या खाते इनएक्टिव हो गए हैं। जिसके कारण ऐसे खातों में सब्सिडी की रकम नहीं पहुंच रही है, बल्कि बैंक में ही अटकी रहती है। खाते को बैंक द्वारा फिर एक्टिव किया जाता है। तभी सब्सिडी की रकम जमा होती है। जानकारी के अभाव में लोगों को सब्सिडी की राशि नहीं मिल रही है। लोग बहुत परेशान हैं।

आधार भी बना सब्सिडी का दुश्मन
जिला प्रशासन के दावों की मानें तो जिले में हर एक व्यक्ति को आधार से जोड़ दिया गया है। लेकिन वास्तविकता इससे जुदा है। अब भी लोग आधार कार्ड बनवाने के लिए भटक रहे हैं। तो कुछ ऐसे भी हैं। जिनके आधार कार्ड बने तो हैं। लेकिन उन्हें मिले नहीं हैं। सब्सिडी प्राप्त करने के लिए आधार कार्ड बैंक के साथ गैस एजेंसी में जमा करना अनिवार्य है। दोनों स्थानों पर आधार जमा नहीं है, तो सब्सिडी प्राप्त करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

जनधन योजना के बाद थोक मेें बढ़े उपभोक्ता
उज्ज्वला योजना के तहत उपभोक्ताओं को 200 रुपए में कनेक्शन के साथ चुल्हा व भरा हुआ गैस सिलेंडर शासन द्वारा प्रदाया किया जाता है। जबकि भरा सिलेंडर हितग्राही के नाम से जारी होने के बाद उस पर मिलने वाली सब्सिडी की राशि भी सीधे उपभोक्ता के बैंक खाते में पहुंच जाती है। इस तरह उन्हें शासन को 200 रुपए चुकाने के बाद सब्सिडी में 309 रुपए मिल जाते हैं। इस योजना का लाभ लेने के लिए लोगों में होड़ मची हुई है। उज्ज्वला योजना लागू होने के बाद जिले में एलपीजी उपभोक्तओं की संख्या में दोगुनी हो गई है। इसलिए नियमित अंतरालों पर तरह-तरह की समस्याएं पैदा हो जती है।

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